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छत्तीसगढ़ में चुनावी वर्ष जांच एजेंसियां बनीं राजनीतिक दलों की ताकत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, कांग्रेस और भाजपा की सरकारें जांच एजेंसियों को सक्रिय करती जा रही हैं। प्रदेश में पिछले तीन महीने से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 30 अधिकारियों की टीम डेरा डाले हुए है। इस टीम ने अब तक पांच आइएएस, एक राज्य प्रशासिनक सेवा के अधिकारी, कांग्रेस नेता और पांच कारोबारियों पर शिकंजा कसा है। ईडी की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार की जांच एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आथ्र्ािक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने भाजपा नेताओं के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच शुरू कर दी है।

ताजा मामला पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का है, जिनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईओडब्ल्यू ने जांच करने जा रही है। इससे पहले कांग्रेस सरकार ने नान घोटाले, झीरम कांड, सीडी कांड की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया था। प्रदेश मेें नवंबर-दिसंबर मेें विधानसभा केचुनाव प्रस्तावित हैैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राजनीतिक दल इन जांच एजेंसियों को ताकत के रूप मेें इस्तेमाल करने मेें लगी हुई हैैं।

जांच एजेेंसियोें की सक्रियता पर कांग्रेस और भाजपा लगातार सवाल उठा रहे हैैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्र सरकार ईडी और आयकर टीम (आइटी) का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध निकालने के लिए कर रही है। ईडी की पिछले तीन महीने की कार्रवाई मेें एक भी आरोप प्रमाणित नहीं हुआ है। अधिकारियोें, नेताओें और कारोबारियोें को परेशान करने केलिए ईडी की तरफ से नोटिस दिया जा रहा है।

पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से प्रदेश मेें कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है। भाजपा नेताओें पर एसीबी और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई सिर्फहताशा निकालने केलिए की जा रही हैै।

इन अधिकारियोें पर ईडी ने की कार्रवाई

ईडी ने पहले आइएएस समीर बिश्नोई और राज्य प्रशासनिक सेवा की सौम्या चौरसिया केखिलाफ कार्रवाई की। दोनोें अधिकारी अभी जेल मेें हैैं। वहीं आइएएस जेपी मौर्या, रानू साहू, अनबलगन पी., अलरमेलमंगई डी. सहित एक दर्जन आइएएस और आइपीएस अधिकारियोें को नोटिस देकर पूछताछ की है।

एसीबी-ईओडब्ल्यू के निशाने पर भाजपा नेता

इधर, एसीबी और ईओडब्ल्यू केनिशाने पर अब भाजपा नेता हैैं। इसमेें पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सबसे प्रमुख हैैं। एसआइटी ने डीकेएस घोटाले की जांच भी शुरू की थी, जो अभी ठंडे बस्ते मेें है।

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