6 महीने से वेतन को तरसते श्रमिक, पाई-पाई के लिए मोहताज हुए पंडरिया के अन्नदाता किसान, प्रबंध संचालक की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

आशु चंद्रवंशी, कवर्धा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित, पंडरिया इन दिनों गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय संकट से जूझ रहा है। कारखाना प्रबंधन की कथित लचर व्यवस्था के खिलाफ श्रमिक कल्याण संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने प्रबंध संचालक उत्तर कुमार कौशिक को एक ज्ञापन सौंपकर श्रमिकों और किसानों के महीनों से लंबित भुगतान को तत्काल जारी करने की मांग की है।
संघ का आरोप है कि बड़ी-बड़ी बातें और दावे करने वाले प्रबंधन के कार्यकाल में कारखाना सुधरने के बजाय गर्त में जा रहा है।
श्रमिकों का 6 माह से भुगतान बाकी, भुखमरी की नौबत
श्रमिक कल्याण संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कारखाने में दिन-रात पसीना बहाने वाले श्रमिकों का जनवरी और फरवरी माह का भुगतान पिछले 6 महीनों से अटका हुआ है। इस कमरतोड़ महंगाई में श्रमिकों के सामने बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस, कॉपी-किताबें और रोजमर्रा के राशन की व्यवस्था करना दूभर हो गया है।संघ ने तीखा आक्रोश जताते हुए कहा कि जब प्रबंध संचालक उत्तर कुमार कौशिक ने प्रभार लिया था, तब उन्होंने आउटसोर्सिंग बंद करने, बाहरी ठेका कंपनियों (जैसे ओम इंटरप्राइजेस, केस्टैक, ग्लोबल) को हटाने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन जमीन पर इसके उलट हुआ; कथित तौर पर सैकड़ों स्थानीय मजदूरों को काम से निकालकर बेरोजगार कर दिया गया। संघ ने कहा कि प्रबंधन अपनी कथनी और वादों में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। कारखाने से बाहरी ठेका कंपनियों और संदिग्ध भुगतानों को बंद करने का दावा हवा-हवाई साबित हुआ है, जिससे श्रमिकों में भारी असंतोष है।
गन्ना किसानों का भुगतान अटका, आगामी पेराई सीजन पर संकट
कारखाने की रीढ़ कहे जाने वाले क्षेत्र के गन्ना किसान भी इस समय बेहद परेशान हैं। पेराई सीजन सत्र 2025-26 के गन्ना की मूल राशि का भुगतान अब तक लंबित है। वर्तमान में खरीफ फसल की बुआई का समय है। खाद, बीज और कृषि कार्यों के लिए किसानों को पैसों की सख्त जरूरत है। समय पर भुगतान न मिलने से किसान बैंकों के कर्ज की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं। वही किसानों का कहना है कि यदि भुगतान में इसी तरह की लेत-लतीफी होती रही, तो आगामी पेराई सीजन में किसान इस कारखाने को गन्ना देना बंद कर सकते हैं, जिससे कारखाने को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
दूसरों की सुरक्षा करने वाले सुरक्षा गार्ड खुद असुरक्षित
हैरानी की बात यह है कि कारखाने की करोड़ों रुपये की संपत्ति और मशीनरी की चौबीसों घंटे रखवाली करने वाले सुरक्षा गार्ड खुद अनिश्चितता के साए में जी रहे हैं। संघ के अनुसार, सुरक्षा कर्मियों को भी लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा उन्हें कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा संसाधन तक मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।
आंदोलन की दी चेतावनी
श्रमिक कल्याण संघ ने प्रबंध संचालक उत्तर कुमार कौशिक से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी लंबित भुगतानों को तत्काल प्रभाव से जारी करने का आग्रह किया है। संघ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि श्रमिकों, किसानों और सुरक्षा गार्डों की जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कारखाना प्रशासन की होगी।
इस संबंध में जब प्रबंध संचालक उत्तर कुमार कौशिक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क करने की कोशिश किया गया साथ ही उनको फोन करने पर उनके द्वारा कोई कॉल अटेंड नहीं किया गया।



