वनांचल में आवास योजना का बंटाधार : एक ही परिवार को दो पीएम आवास, दो साल बाद भी अधूरे पड़े 20 से ज्यादा मकान, ठेकेदारों पर FIR के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी

आशु चंद्रवंशी, कवर्धा। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवारों को पक्का मकान देना है, लेकिन कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र में योजना की जमीनी हकीकत पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। बोड़ला ब्लॉक के एक गांव में पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग आवास दे दिया गया, जबकि 20 से अधिक मकान दो साल बाद भी अधूरे पड़े हैं।
अपात्रों को लाभ, पात्र इंतजार में
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत बेंदा में हितग्राही चयन से लेकर निर्माण तक पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। शिकायत है कि एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों को योजना का लाभ दे दिया गया, जबकि गांव में कई वास्तविक जरूरतमंद बैगा परिवार आज भी स्वीकृति के इंतजार में हैं। दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी 20 से ज्यादा आवास अधूरे हैं।
20 से अधिक आवास अधूरे, मकान की आस में ग्रामीण
जिन परिवारों को पक्के मकान की उम्मीद थी, वे आज भी अधूरे निर्माण के बीच गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। पात्र बैगा परिवारों का कहना है कि सिलसिलेवार ग्रामीणों के आवास को ही अधूरा छोड़ दिया गया। कुछ आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को अलग-अलग आवास योजनाओं का लाभ मिल गया, जबकि जरूरतमंद बैगा परिवार छूट गए।
तीन ठेकेदारों पर एफआईआर, पर गिरफ्तारी नहीं
आवास निर्माण में कथित अनियमितता के मामले में अलग-अलग थानों में तीन ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब जांच में अनियमितता मिली है तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
सचिव ने बताई दो पत्नियों की बात
मामले में ग्राम पंचायत के सचिव ने बताया कि एक परिवार के पति और पत्नी को आवास स्वीकृति होने की शिकायत के बाद हितग्राही चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। वहीं पंचायत प्रशासन का कहना है कि संबंधित व्यक्ति की दो पत्नियां हैं और पति तथा एक पत्नी को अलग-अलग आवास का लाभ मिला है। हालांकि दोनों स्वीकृतियों की पात्रता, पारिवारिक स्थिति और योजना के नियमों के अनुसार लाभ दिए जाने की जांच अभी भी अधूरी है।
जांच और कार्रवाई का इंतजार
हितग्राही चयन से लेकर निर्माण कार्य में सामने आई गड़बड़ियों ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अधूरे मकानों को जल्द पूरा कराने की मांग की है।



