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कबीरधाम के अश्वनी कोसरे ‘प्रेरक’ को मिला छन्द रतन सम्मान-2026, पहली कृति ‘माता सफुरा के तप’ का हुआ विमोचन

आशु चंद्रवंशी,कवर्धा। छत्तीसगढ़ी साहित्य और छंद साधना के क्षेत्र में कबीरधाम जिले का मान बढ़ाते हुए कवर्धा के उभरते साहित्यकार अश्वनी कोसरे ‘प्रेरक’ को प्रतिष्ठित ‘छन्द रतन सम्मान-2026’ से नवाजा गया है। राजधानी रायपुर के वृंदावन हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रदेश के दिग्गज साहित्यकारों की उपस्थिति में उन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ।

पहली कृति में नारी शक्ति और सतनाम पंथ का संगम

सम्मान समारोह के साथ ही अश्वनी कोसरे ‘प्रेरक’ की प्रथम छत्तीसगढ़ी कृति ‘माता सफुरा के तप’ का विधिवत विमोचन किया गया। यह पुस्तक नारी सशक्तिकरण और तात्कालिक समाज में महिलाओं की संघर्षमयी भूमिका पर केंद्रित है। पुस्तक में माता सफुरा के जीवन, उनके सत-धर्म, त्याग और सतनाम पंथ के प्रति उनके समर्पण को छंदबद्ध तरीके से पिरोया गया है। कार्यक्रम में मौजूद दीदी सुमित्रा (राजनंदगांव) ने पुस्तक चर्चा के दौरान लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि इसमें नारी हृदय की पीड़ा और तपस्या का मार्मिक चित्रण है।

वरिष्ठ अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति

‘छन्द के छ’ संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अशोक तिवारी ने की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ साहित्यकार सुशील शर्मा, सरला शर्मा एवं सपना निगम उपस्थित रहीं। ‘छन्द के छ’ के संस्थापक और ऑनलाइन गुरुकुल के कुलपति गुरुदेव अरुण कुमार निगम के सानिध्य में यह आयोजन संपन्न हुआ।

छंद साधना और मधुर व्यक्तित्व के धनी

अश्वनी कोसरे ‘प्रेरक’ न केवल अपनी लेखनी बल्कि अपने मधुर व्यवहार और सुरीली आवाज के लिए भी साहित्य जगत में पहचाने जाते हैं। उनकी पुस्तक में गुरु महिमा, पुत्र विछोह और माता सफुरा के सामाजिक योगदान को जिस बारीकी से छंदों में ढाला गया है, उसे उपस्थित विद्वानों ने अद्भुत बताया।

शुभकामनाओं का लगा तांता

इस उपलब्धि पर कवर्धा सहित प्रदेश भर के साहित्यकारों, उनके परिजनों और मित्रगणों ने खुशी जाहिर की है। अश्वनी कोसरे ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों और छंद परिवार को दिया है। उनकी इस उपलब्धि से कबीरधाम जिले के साहित्यिक हलके में हर्ष का माहौल है।”गुरु महिमा जस अमृत धारा, पोहय तन-मन ज्ञान सहारा…” – इन पंक्तियों के साथ अश्वनी कोसरे की लेखनी ने छत्तीसगढ़ी बोली और संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने का संकल्प दोहराया है।

अश्वनी कोसरे ‘प्रेरक’ की प्रथम छत्तीसगढ़ी कृति ‘माता सफुरा के तप

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