स्वर्णमयी सफलता: चैतन्य हायर सेकेंडरी स्कूल, पोंडी के दिव्यांग खिलाड़ियों ने राज्य स्तर पर गाड़े जीत के झंडे,नन्हे चैंपियंस का हुआ भव्य स्वागत

आशु चंद्रवंशी,कवर्धा। खेल के मैदान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे जिले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। 16वीं राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में चैतन्य हायर सेकेंडरी स्कूल, पोंडी के जांबाज खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। विद्यालय के इन ‘सुपर हीरोज’ ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए कुल 12 पदक (7 स्वर्ण और 5 रजत) जीतकर इतिहास रच दिया। वही इस खुशी के मौके पर खिलाड़ियों के हौसला बढ़ाने के लिए विद्यालय परिवार ने पोड़ी में स्वागत किया। जैसे – जैसे विजय रथ गांव की गलियों से गुजर रहा था ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने तालियां बजाकर और फूल बरसाकर इन पैरा-सितारों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर एसएन. यादव सर ने बताया कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य बच्चों की उपलब्धि को जन-जन तक पहुँचाना था, ताकि हर माता-पिता अपने बच्चों की प्रतिभा पर विश्वास करें और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें।
पदकों की झड़ी: छोटे कंधों पर बड़ी जीत
प्रतियोगिता में स्कूल के तीन सितारों ने अपनी रफ्तार और तकनीक से सबको हैरान कर दिया।प्रतियोगिता में अरुण वर्मा (कक्षा 4) ने 3 स्वर्ण व 2 रजत,गांधी कुर्रे (कक्षा 5) ने 2 स्वर्ण व 2 रजत,तथा आमीन खान (कक्षा 8) ने 2 स्वर्ण व 1 रजत पदक प्राप्त किए।
कोच और स्कूल का अटूट समर्पण
इस बड़ी कामयाबी के पीछे कोच लिखेंद्र यादव का कड़ा प्रशिक्षण और मार्गदर्शन रहा है, जिन्होंने इन बच्चों के भीतर छिपी खेल प्रतिभा को तराशा। चैतन्य हायर सेकेंडरी स्कूल, पोंडी न केवल शिक्षा बल्कि समावेशी खेल के क्षेत्र में भी जिले के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है।
यह जीत केवल पदकों की नहीं, बल्कि इन बच्चों के अदम्य साहस और कड़ी मेहनत की जीत है। विद्यालय के सीईओ चैतन्य यादव ने बताया कि हमारे स्कूल का लक्ष्य हर छात्र की प्रतिभा को सही मंच देना है।
विद्यालय में उत्सव का माहौल
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्राचार्य संजय कुमार राय, उप-प्राचार्य पूनम दास साहू और प्रधानाध्यापक सुदर्शन यादव सहित समस्त शिक्षक स्टाफ ने खुशी जाहिर की है। पेखन मेरावी, राहुल यादव, महेश्वरी सेन और अन्य शिक्षकों ने खिलाड़ियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। स्कूल परिसर में जीत का जश्न मनाया जा रहा है और इन नन्हे एथलीट्स को भविष्य के पैरालंपिक स्टार्स के रूप में देखा जा रहा है।



