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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में कागजी बैठकों का बड़ा खेल : आरटीआई में खुलासा

आशु चंद्रवंशी,बोड़ला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला इन दिनों मरीजों के इलाज से ज्यादा कागजी हेराफेरी के लिए सुर्खियों में है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी ने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। बैठकों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट इस कदर किया गया है कि अब उसे छिपाने के लिए जन सूचना अधिकारी भ्रामक और आधी-अधूरी जानकारी परोस रहे हैं।

तारीखों का मायाजाल: फर्जीवाड़े की आशंका

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में आवेदक ने 1 जनवरी 2023 से 4 दिसंबर 2025 तक की साप्ताहिक और मासिक समीक्षा बैठकों का ब्यौरा मांगा था। लेकिन जो दस्तावेज दिए गए, वे किसी कॉमेडी शो से कम नहीं हैं। कई उपस्थिति पत्रकों में बैठक की तारीख ही नहीं है। यानी बैठक कब हुई, किसी को नहीं पता। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि उपस्थिति पत्रक के ऊपर जो तारीख दर्ज है, अधिकारियों और डॉक्टरों द्वारा किए गए हस्ताक्षर के नीचे की तारीख उससे पूरी तरह अलग है। वही बिलों में जमकर कटिंग और ओवरराइटिंग की गई है। पुराने बिलों की तारीखें बदलकर उन्हें नया रूप देने की कोशिश साफ झलक रही है।उपस्थिति पत्रक और बिलों को जानबूझकर गलत तरीके से फोटोकॉपी कर दिया गया है ताकि सही जानकारी पता ना चल सके।

बीपीएम की भूमिका पर गहराता संदेह

अस्पताल के गलियारों में चर्चा है कि इस पूरे बिल-वाउचर खेल के पीछे ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर का दिमाग है। बैठकों के आयोजन से लेकर खान-पान के खर्च के प्रबंधन की जिम्मेदारी बीपीएम की होती है। दस्तावेजों में दिख रही विसंगतियां और बिलों में की गई कांट-छांट सीधे तौर पर बीपीएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या बजट खपाने के लिए यह सारा प्रपंच रचा गया।

2025 का डेटा लापता, आखिर डर किसका

हैरानी की बात है कि आवेदक ने 1 जनवरी 2023 से 4 दिसंबर 2025 तक का रिकॉर्ड मांगा था, लेकिन जन सूचना अधिकारी ने 2025 की एक भी बैठक की जानकारी नहीं दी। नियमतः आवेदन की तारीख तक की सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन पूरे साल का रिकॉर्ड दबा लेना यह साबित करता है कि हालिया दौर में भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हुई हैं। यह सूचना के अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन और आवेदक को गुमराह करने की साजिश है। जन सूचना अधिकारी ने आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी देकर न केवल आवेदक को गुमराह किया है, बल्कि आरटीआई अधिनियम की धारा 20 का भी उल्लंघन किया है।

ठंडा-मीठा गायब, केवल कागजों में शाही नाश्ता

सूत्रों के मुताबिक, रिकॉर्ड में ठंडा, चाय, पानी बॉटल, मीठा, समोसा और आलू गुंडा का भारी-भरकम खर्च दिखाया गया है। लेकिन जब ज़मीनी हकीकत टटोली गई तो कर्मचारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर दबी जुबान में बताया कि कभी-कभी केवल एक समोसा या आलू गुंडा नसीब होता था, बाकी ठंडा और मीठा तो केवल फाइलों में ही परोसा गया है। वही कुछ और डॉक्टरों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कुबूल किया कि नाश्ता कभी-कभी ही मिलता था, लेकिन बिलों में इसे नियमित और भव्य दिखाया गया है।

जन सूचना अधिकारी की जालसाजी

जन सूचना अधिकारी ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय पहेलियां बुझा दी हैं। भ्रामक जानकारी देना और मुख्य दस्तावेजों को छिपाना यह दर्शाता है कि संस्थान के भीतर किसी बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश की जा रही है।वही इस विषय पर जानकारी लेने खंड चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात करने कार्यालय गया,लेकिन अधिकारी से मुलाकात नहीं हुआ।

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