हिंदू संगम के दूसरे दिन ‘परिवार सम्मेलन’ का भव्य आयोजन: भारतीय संस्कारों और कुटुम्ब प्रबोधन पर दिया जोर

आशु चंद्रवंशी,बोड़ला। कबीरधाम जिले के बोड़ला नगर में आयोजित ‘हिंदू संगम’ कार्यक्रम के दूसरे दिन परिवार सम्मेलन का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से आए संगठन के कार्यकर्ता अपने परिवारों के साथ भारी संख्या में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण और सामूहिकता की भावना को सुदृढ़ करना रहा।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान से पधारे कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक कैलाश चंद्र जोशी उपस्थित रहे। उनके साथ सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज की।
संबोधन के मुख्य अंश
कैलाश चंद्र जोशी (कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक): उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार ही समाज और राष्ट्र की नींव है। पाश्चात्य संस्कृति के दौर में हमें अपनी जड़ों और संस्कारों को बचाए रखने के लिए ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ की नितांत आवश्यकता है।
नारायण नामदेव (सह प्रांत प्रचारक):
उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि संगठन की शक्ति परिवार के सहयोग से ही दोगुनी होती है। परिवारों का एक साथ आना समाज में एकता का सकारात्मक संदेश देता है।
फग्गन सिंह कुलस्ते (सांसद): सांसद ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं और आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।
भारी जनसैलाब और उत्साह
द्वितीय दिवस के इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। पूरा परिसर परिवारों की उपस्थिति से जीवंत हो उठा। सामूहिक चर्चाओं और वैचारिक सत्रों के माध्यम से परिवारों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक किया गया।
पारंपरिक वेशभूषा ने खींचा सबका ध्यान
सम्मेलन की विशेषता इसकी सादगी और सांस्कृतिक झलक रही। कार्यक्रम में शामिल सभी पुरुष धोती-कुर्ता और महिलाएं साड़ी में नजर आईं, जो भारतीय परंपरा के प्रति उनके गौरव को दर्शा रहा था। आयोजन समिति द्वारा प्रत्येक परिवार को सम्मान स्वरूप रामचरितमानस, दंड और प्रभु श्री रामचंद्र जी का चित्र भेंट किया गया।
वर्ष 2013 से अनवरत जारी है परंपरा आयोजन समिति के संयोजक दुर्गेश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह कारवां हर साल भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस वर्ष भी 13 से 18 जनवरी तक प्रतिदिन अलग-अलग वर्गों के लिए विशिष्ट सम्मेलनों का खाका तैयार किया गया है। हिंदू संगम बोड़ला में भंडारे का विशेष आयोजन किया गया है,जिसमें सभी को लगातार भोजन प्रसादी मिलता रहेगा।हिंदू संगम का यह द्वितीय दिवस न केवल वैचारिक आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि इसने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को भी धरातल पर चरितार्थ किया।



