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बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं का ‘अकाल’, मरीज हो रहे परेशान : दर्द की बुनियादी दवा खत्म, सप्लाई चेन पर उठे सवाल, जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा प्रशासन

आशु चंद्रवंशी,कवर्धा।छत्तीसगढ़ सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे कबीरधाम जिले के बोड़ला में खोखले नजर आ रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला इन दिनों दवाओं की भारी कमी को लेकर चर्चा में है। स्थिति यह है कि अस्पताल में न तो मरीजों को आवश्यक बुनियादी दवाएं मिल पा रही हैं और न ही स्वास्थ्य प्रशासन पारदर्शी ढंग से स्थिति स्पष्ट कर पा रहा है। दवाओं की कमी का सीधा ठीकरा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन की सप्लाई व्यवस्था पर फोड़ा जा रहा है।

अस्पताल में दवाओं का अकाल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में सबसे सामान्य और आवश्यक दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनाक पूरी तरह खत्म हो चुकी है। शरीर दर्द, बुखार या अन्य पीड़ा की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर पर्ची पर दवा लिख तो रहे हैं, लेकिन दवा वितरण केंद्र से उन्हें डाइक्लोफेनाक के स्थान पर अन्य दवाएं देकर लौटा दिया जा रहा है।
एक स्थानीय मरीज ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा,शरीर में हल्का दर्द था गोली के लिए अस्पताल में जाकर पर्ची कटवाया।फिर डॉक्टर ने गोली और इंजेक्शन दोनों लिखे थे, लेकिन अस्पताल में डाइक्लो या अलग से दर्द की गोली नहीं मिली। जब सरकारी अस्पताल में मामूली दर्द की गोली भी न मिले, तो गरीब आदमी कहाँ जाए ? यह स्थिति केवल एक मरीज की नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले सैकड़ों लोगों की है। तो फिर सरकार के स्वास्थ्य दावों का क्या मतलब?

सप्लाई व्यवस्था का बिगड़ा गणित,स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल

अस्पताल के सूत्रों और प्रशासनिक बयानों के अनुसार, दवाओं की इस कमी का मुख्य कारण वेयर हाउस की लचर सप्लाई व्यवस्था है।जिससे अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। हालांकि, सवाल स्थानीय प्रबंधन पर भी उठ रहे हैं कि जब 10-12 दिनों से स्टॉक खत्म था, तो स्थानीय खंड चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी थी कि वे समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करें या उच्च अधिकारियों को गंभीरता से अवगत कराकर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

अधिकारियों का पक्ष

मामले की गंभीरता को लेकर जब स्थानीय और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा की गई, तो उन्होंने जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया:

बीएमओ, बोड़ला: “डाइक्लोफेनाक की टेबलेट पिछले 10 से 12 दिनों से खत्म है। उसके स्थान पर इंजेक्शन और अन्य दवाएं देते है। हमने वेयर हाउस को कई बार मांग पत्र भेजा है। उम्मीद है कि एक-दो दिनों में सप्लाई मिल जाएगी।”

सीएमएचओ, कबीरधाम: आपके द्वारा जानकारी मिली की दर्द की दवा खत्म हो गई है,लेकिन हमारे पास दर्द का इंजेक्शन और अन्य दवाओं के द्वारा मरीजों का इलाज किया जाता है,जिससे मरीज ठीक हो जाते है। “जिले में वेयर हाउस स्थापित है और वहीं से सभी केंद्रों को दवाएं भेजी जाती हैं। बोड़ला में दवाओं की कमी की जानकारी है, जल्द ही स्टॉक भेज दिया जाएगा।”

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े होते सवाल

जब जिले में वेयर हाउस मौजूद है, तो दवाओं की आपूर्ति में हफ्तों का समय क्यों लग रहा है? क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग केवल ‘सप्लाई आने’ का इंतजार कर मरीजों की जान और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है? जिला प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारे, दवाओं की कमी दूर करे और यह स्पष्ट करे कि वेयर हाउस से अब तक सप्लाई क्यों नहीं हो पाई।
यह लापरवाही सीधे तौर पर जिला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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