आम चर्चा

बोड़ला स्वास्थ्य विभाग में ‘सूचना के अधिकार’ का गला घोंटा: लाखों के खर्च और अटैचमेंट को बताया गोपनीय

आशु चंद्रवंशी,कवर्धा।  कबीरधाम जिले के बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) कार्यालय के जनसूचना अधिकारी ने RTI कानून को ताक पर रखते हुए न केवल सरकारी आदेशों को ‘निजी’ बताकर छिपा लिया, बल्कि स्वास्थ्य योजनाओं में हुए लाखों के खर्च का हिसाब देने से भी साफ इनकार कर दिया है।
अटैचमेंट का खेल: सरकारी आदेश अब ‘पर्सनल’ जानकारी?
आरटीआई आवेदक ने जब कार्यालय में अटैच किए गए कर्मचारियों के नाम और उनके आदेशों की प्रति मांगी, तो विभाग ने धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए इसे ‘व्यक्तिगत जानकारी’ करार दे दिया। आरटीआई विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी का प्रशासनिक पदस्थापना आदेश सार्वजनिक दस्तावेज होता है। इसे गोपनीय बताना नियमों की गलत व्याख्या और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसा है।
लाखों के खर्च पर पर्दा: पेट्रोल-डीजल और शिविरों का हिसाब गायब
आवेदक ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों (मलेरिया, कुष्ठरोग, टीकाकरण) और निरीक्षण वाहनों के ईंधन खर्च का ब्यौरा मांगा था। इस पर जनसूचना अधिकारी ने सामान्य प्रशासन विभाग के 2009 के नियम-3 का सहारा लेकर जानकारी देने से मना कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह नियम केवल आवेदन के प्रारूप से संबंधित है, सूचना की गोपनीयता से नहीं।
इन सवालों के घेरे में विभाग:
खर्च का सच: क्या स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर जारी लाखों रुपये का बंदरबांट हुआ है?
अटैचमेंट की राजनीति: आखिर किन रसूखदार कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध अटैच किया गया है जिन्हें विभाग छिपाना चाहता है?
जवाबदेही किसकी: क्या बीएमओ कार्यालय खुद को आरटीआई कानून से ऊपर समझता है?
कार्रवाई की मांग: जिला प्रशासन तक पहुंचा मामला
इस मनमानी के खिलाफ अब आरटीआई आवेदक ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से सख्त कार्रवाई की मांग की है। मांग की गई है कि दोषी अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाए और रोकी गई जानकारी तत्काल सार्वजनिक की जाए।
अधिकारी नदारद: इस पूरे विवाद पर पक्ष जानने के लिए जब बीएमओ बोड़ला से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे।

गुमराह करने वाले तर्क: सामान्य प्रशासन के नियमों की गलत व्याख्या कर छिपाई जा रही जानकारी।
वित्तीय पारदर्शिता पर हमला: जनता के पैसे का हिसाब देने से बच रहा स्वास्थ्य विभाग।
भ्रष्टाचार की बू: जानकारी छिपाने की छटपटाहट से कागजों में योजनाएं चलने का संदेह।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button