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वनांचल में किलर कुल्हाड़ी : राजाढार-बोक्करखार मार्ग पर सराई के पेड़ों की धीमी हत्या, सो रहा वन विभाग

आशु चंद्रवंशी,कवर्धा।  जिले के बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत वनांचल क्षेत्रों में बेशकीमती इमारती लकड़ियों की खुलेआम बलि दी जा रही है। राजाढार से बोक्करखार मार्ग पर सराई (साल) के पेड़ों को जिस सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, उसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि मुख्य मार्ग के किनारे ही पेड़ों को “अधमरा” कर सुखाने का खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में हैं।

साजिश का तरीका: पहले ‘गोलाई’ में कटाई, फिर सूखने का इंतजार

सड़क किनारे का नजारा किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है। अज्ञात तस्करों ने एक विशालकाय पेड़ को तो धराशायी कर ही दिया है, लेकिन असली चालाकी लगभग 15 अन्य पेड़ों के साथ बरती गई है। इन पेड़ों को नीचे से चारों ओर गोलाई में काटकर छोड़ दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है: जब पेड़ की छाल और निचली परतों को चारों तरफ से काट दिया जाता है, तो जमीन से पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है। इससे पेड़ धीरे-धीरे सूख जाता है। जब पेड़ पूरी तरह सूख जाएगा, तब इसे “सूखी लकड़ी” बताकर आसानी से काटकर ठिकाने लगा दिया जाएगा।

मुख्य मार्ग पर बेखौफ तस्कर, विभाग को भनक तक नहीं

हैरानी की बात यह है कि यह अवैध कटाई किसी घने जंगल के भीतर नहीं, बल्कि मुख्य मार्ग से सटे क्षेत्र में हो रही है। यहाँ से रोजाना राहगीर गुजरते हैं, ग्रामीण अपनी आवाजाही करते हैं, तो क्या बीट गार्ड, डिप्टी रेंजर और रेंजर की नजरें यहाँ से नहीं गुजरतीं? ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर तस्करों और रक्षकों के बीच कोई “मौन समझौता” हो चुका है।

सुलगते सवाल: लापरवाही या मिलीभगत?

निगरानी तंत्र कहाँ है? बीट गार्ड की जिम्मेदारी क्षेत्र में गश्त करने की होती है, फिर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों को नुकसान पहुँचाना उनकी नजर से कैसे बच गया?
इशारों पर खेल: पेड़ों को गोल काटकर सुखाने की तकनीक पेशेवर तस्करों की पहचान है। क्या विभाग को इस “पैटर्न” की जानकारी नहीं है?
जिम्मेदारी किसकी? यदि मुख्य मार्ग सुरक्षित नहीं है, तो जंगल के भीतरी इलाकों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

अब कार्रवाई का इंतजार

जंगल बचाने का जिम्मा जिन कंधों पर है, उनकी खामोशी ने तस्करों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि खबर सुर्खियाँ बनने के बाद विभाग कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर कानून की कुल्हाड़ी तस्करों तक पहुँचने से पहले ही जंगल साफ हो जाता है।

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