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बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ‘मुफ्त’ नसबंदी के नाम पर वसूली, 1500 से 3000 रुपये तक की उगाही का आरोप

कवर्धा/बोड़ला। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जहां गरीबों को राहत देने के लिए बनाई गई हैं, वहीं बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अस्पताल में चल रही मुफ्त महिला नसबंदी योजना अब कथित तौर पर अवैध कमाई का जरिया बन गई है। पीड़ित महिलाओं और उनके परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर 1500 से लेकर 3000 रुपये तक वसूलने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

मुफ़्त नसबंदी योजना में ‘पैसा वसूली का लगा आरोप

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में 1500 से 3000 तक की उगाही का सनसनीखेज़ आरोप है। भंडार ग्राम की पीड़ित महिला ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन के लिए 1500 रुपये लिए गए। मेरे द्वारा मितानिन को अस्पताल में पैसा दिया गया महिला के अनुसार, मितानिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अस्पताल में स्टाफ नर्स गिरजा भास्कर पैसे मांग रही है, नहीं दिए तो ऑपरेशन भी नहीं होगा।” मजबूरी ऐसी कि सुबह से बैठी महिलाओं का नंबर नहीं आया, लेकिन जो महिलाएं बाद में आईं—उनका ऑपरेशन पहले हो गया। जैसे ही पैसे देने की सहमति बनी, तुरंत नंबर आया और ऑपरेशन कर दिया गया। इतना ही नही ओड़िसा की महिला का नसबंदी होने का भी आरोप आया सामने।

एक अन्य महिला ने आरोप लगाया कि उससे 400 रुपये यह कहकर लिए गए कि “बहुत मुश्किल से डिलीवरी कराई है, मैं नहीं रहती तो कवर्धा ले जाना पड़ता।” सवाल यह है कि जब सरकारी सेवा मुफ़्त है, तो यह रकम किस बात की?

बाहरी राज्यों से आईं महिलाएं भी ‘टारगेट’ मे

जांच-पड़ताल में और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मितानिन के अनुसार  दिसंबर 2025 को हुए ऑपरेशनों में ओडिशा से आए लोगों का भी नसबंदी ऑपरेशन किया गया। यही नहीं, मध्यप्रदेश से आई महिलाओं से 3 हजार रुपये तक लेने के आरोप भी सामने आए हैं।

सब सेट हो जाएगा — खुलेआम सौदेबाज़ी का आरोप

मितानिन ने यह भी बताया कि नर्स द्वारा यह भरोसा दिलाया गया कि पैसे दो, सब सेट कर लेंगे, ऑपरेशन हो जाएगा। यह कथन यदि सही पाया जाता है, तो यह केवल रिश्वत नहीं बल्कि व्यवस्थित लूट का संकेत देता है।

जिस स्टाफ नर्स पर आरोप है, उनकी मूल पदस्थापना बैरख उप स्वास्थ्य केंद्र में बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी तरह के रवैये के चलते पहले भी शिकायत कर उन्हें गांव से हटवाया गया था—लेकिन आदत अब भी नहीं बदली।

अधिकारियों का पक्ष

मामले की जानकारी मिली है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उस पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। — खंड चिकित्सा अधिकारी बोड़ला

यदि कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है या मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी। भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी — सीएमएचओ कबीरधाम

सवाल जो जवाब मांगते हैं:जांच के बाद खुलेगा सच

हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन इतना तय है कि शासन की जनकल्याणकारी और मुफ़्त स्वास्थ्य योजनाओं में यदि इस तरह की रिश्वतखोरी हुई है, तो यह गरीब और मजबूर महिलाओं के साथ सीधा अन्याय है।

सरकारी अस्पताल में मुफ्त सेवा के बदले वसूली करने की हिम्मत स्टाफ में कहां से आती है?
क्या उच्च अधिकारियों के संरक्षण के बिना इतना बड़ा खेल मुमकिन है?
क्या पीड़ित गरीब महिलाओं को उनका हक और न्याय मिल पाएगा?

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