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गांजा तस्करी मामले में छह साल से अधिक समय तक जेल में बंद खंडवा के कमल सरोदे बरी,वकील जितेंद्र कुमार चंद्राकर ने की पैरवी

आशु चंद्रवंशी,पत्रकार। केंद्रीय जेल बिलासपुर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत छह साल से अधिक समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में बंद रहे मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के निवासी कमल सरोदे को आज बिलासपुर की एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।कमल सरोदे को गौरेला थाना पुलिस ने 31 मार्च 2019 को 10 क्विंटल 38 किलो 500 ग्राम गांजा के कथित अवैध परिवहन के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह केंद्रीय जेल बिलासपुर में न्यायिक हिरासत में थे।यह मामला विचारण न्यायालय में पुलिस गवाहों की लगातार अनुपस्थिति के कारण लंबे समय तक लंबित रहा, जिसके परिणामस्वरूप कमल सरोदे ने साढ़े छह साल से अधिक की अवधि जेल में बिताई।आज दिनांक 17 नवंबर 2025 माननीय विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस, बिलासपुर ने मामले में निर्णय सुनाते हुए कमल सरोदे को दोषमुक्त (बरी) कर दिया। इस मामले में कमल सरोदे की ओर से पैरवी करने वाले वकील जितेंद्र कुमार चंद्राकर ने मुख्य भूमिका निभाई।आरोपी की ओर से बिलासपुर के वकील जितेंद्र चंद्राकर की दलीलों और मामले की परिस्थितियों ने सरोदे की दोषमुक्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वही सुनवाई के दौरान, यह पाया गया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और संदेह से परे सबूत पेश करने में विफल रहा न्यायालय के इस फैसले ने न्याय में देरी और विचाराधीन कैदियों की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, जिन्हें अक्सर विचारण (ट्रायल) में देरी के कारण लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है। कमल सरोदे की रिहाई ने उनके परिवार और शुभचिंतकों को राहत दी है। वहीं कमल सरोदे और उनके परिवारजनो ने वकील जितेंद्र कुमार चंद्राकर और राजेश चंद्राकर, तरुण नायक, संजय साहू का आभार व्यक्त किया।

✍️आशु चंद्रवंशी,पत्रकार 9981831501

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