छन्द के छ का दिवाली मिलन और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम राजधानी रायपुर के वृन्दावन सभागार में सफलतापूर्वक हुआ सम्पन्न

कार्तिक पूर्णिमा गुरु नानक जयंती के पावन अवसर पर छ्त्तीसगढ़ी भाखा और साहित्य के लिए प्रण प्राण से समर्पित साहित्यिक संस्था या कहें साहित्यिक परिवार छन्द के छ का दिवाली मिलन और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम राजधानी रायपुर के वृन्दावन सभागार में हर बार की तरह बहुत ही सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में श्रीमती सरला शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार भिलाई उपस्थित रहीं तथा अध्यक्षता छन्द के छ के संस्थापक गुरुदेव अरुण कुमार निगम दुर्ग ने की। विशिष्ट आमंत्रित अतिथियों में डॉ.सुरेश देशमुख वरिष्ठ साहित्यकार व उद्घोषक चंदैनी गोंदा, डॉ.मानिक विश्वकर्मा नवरंग वरिष्ठ साहित्यकार रायपुर, प्रोफेसर डॉ. सुधीर शर्मा वरिष्ठ साहित्कार व प्रकाशक वैभव प्रकाशन रायपुर और श्रीमती सपना निगम वरिष्ठ साहित्यकार दुर्ग उपस्थित रहीं।
दो सत्र में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारम्भ छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी की पूजन-अर्चन व गुरुदेव अरुण कुमार निगम द्वारा रचित छ्त्तीसगढ़ी भाखा महतारी की वन्दना का सस्वर गायन से हुआ। इसके पश्चात छन्द के छ के छन्द साधकों की कृतियों का विमोचन किया गया जिसमें कुल नौ कृतियाँ विमोचित हुई। आयोजन में कबीरधाम कवर्धा के व्याख्याता और साहित्यकार द्वारिका प्रसाद लहरे की द्वितीय छन्दबद्ध कृति सतनाम संदेशा का विमोचन भी हुआ। इससे पहले उनकी कृति छन्द गीत बहार विमोचित हुई थी जिसे छत्तीसगढ़ी का प्रथम छन्दगीत संग्रह होने का गौरव प्राप्त है।
द्वारिका प्रसाद लहरे ने बताया कि उनकी इस कृति में परमपूज्य गुरु घासीदास बाबा के ब्यालीस वाणी और सात संदेश को पवित्र भाव के साथ छन्दबद्ध किया गया है। सतगुरु घासीदास बाबा के पावन प्रासंगिक संदेशों को जनमानस तक पहुँचाने में यह किताब अपना महती योगदान देगी। आयोजन में कबीरधाम जिला से शिरकत करने वाले साहित्यकारों सुखदेव सिंह अहिलेश्वर, अश्वनी कोसरे और आनंद मरकाम सहित अन्य साहित्यकारों व ईष्टमित्रों ने श्री द्वारिका प्रसाद लहरे को महत्वपूर्ण किताब विमोचन के लिए बधाई और शुभकामनाएँ दी है।
आयोजन के प्रथम सत्र का संचालन अजय अमृतांशु भाटापारा ने किया। भोजनावकाश के बाद आयोजन के द्वितीय सत्र में उद्बोधन और छन्दमय कवि सम्मेलन का संचालन जितेन्द्र वर्मा खैरझिटिया कोरबा, जगदीश हीरा साहू भाटापारा व सुनील शर्मा नील बेमेतरा ने किया। जिसमें प्रदेश के लगभग अठारह से बीस जिलों से आये साठ से अधिक छन्दसाधक रचनाकारों ने अपनी श्रेष्ठ और मधुरतम् प्रस्तुतियाँ दी। अंतिम प्रस्तुति तक सभागार में उपस्थित सुधी जन भाव विभोर होते रहे।



