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बेलगाम रफ्तार : बोड़ला-फास्टरपुर मार्ग पर भारी वाहनों के लिए बिछी है लाल कालीन,भारी वाहनों के तांडव से कांप रहा सड़क : वर्दी का खौफ खत्म! प्रशासन को दे रहे खुली चुनौती, नो-एंट्री सिर्फ कागजों पर!प्रशासन की ‘मेहरबानी’ या बड़ी नाकामी?

आशु चंद्रवंशी, कवर्धा। कबीरधाम जिले के बोड़ला- मोहगांव -फास्टरपुर मार्ग इन दिनों भारी वाहनों की अवैध सुरक्षित शरणस्थली बन गया है। जहाँ एक ओर शासन ने इस मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित किया है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभाग अपनी आँखों पर पट्टी बांधकर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये तेज रफ्तार ट्रक बोड़ला एसडीएम कार्यालय, तहसील और थाने के ठीक सामने से हुंकार भरते हुए गुजरते हैं, लेकिन खाकी और प्रशासन की चुप्पी कई अनसुलझे सवाल खड़े कर रही है।

टोल बचाने का खेल, सरकार को चूना और जनता को मौत का डर

नियमों के मुताबिक, जबलपुर से बिलासपुर की ओर जाने वाले ट्रकों को नेशनल हाईवे के निर्धारित रूट बोड़ला टोल, पोड़ी, पंडरिया होते हुए नियमों का पालन करना चाहिए। लेकिन टोल टैक्स बचाने के लालच में ट्रक चालक बोड़ला से मोहगांव फ़ास्टरपुर रोड के भारी वाहन प्रवेश निषेध मार्ग पर शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

गायब हुआ बोर्ड : स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील चौक में यहाँ भारी वाहन निषेध का सूचना बोर्ड लगा था, जो अब रहस्यमयी तरीके से गायब हो चुका है।

सफेदपोशों और खाकी का संरक्षण ?

क्षेत्रवासियों में चर्चा है कि आखिर ये ट्रक किसके हैं? क्या किसी रसूखदार नेता या ऊँची पहुँच वाले व्यक्ति का हाथ है, जिससे पुलिस और यातायात विभाग कार्रवाई करने से कतरा रहा है?

यातायात विभाग का दोहरा मापदंड : छोटे शिकार पर नजर, मगरमच्छों को छूट!
कवर्धा यातायात विभाग रायपुर पॉइंट, सिंघनपुरी सहित अन्य जगहों में कागजात चेक करने के नाम पर सक्रिय दिखता है, लेकिन बोड़ला मोहगांव मार्ग की इस खुली मनमानी पर विभाग मूकबधिर बना बैठा है। जिससे शासन को सीधे तौर पर राजस्व की क्षति हो रही है और ग्रामीणों की जान जोखिम में है, तो विभाग की मुस्तैदी आखिर कहाँ गायब है ?

दहशत में ग्रामीण: बाल-बाल बच रही हैं जानें

सैकड़ों की संख्या में सरपट दौड़ते इन ट्रकों ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। आए दिन लोग इन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से बच रहे हैं। धूल, शोर और कंपन के बीच बोड़ला फास्टरपुर मार्ग अब पैदल चलने लायक भी नहीं बचा है।समय रहते इन भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती नहीं बरती गई, तो यह मार्ग किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। शासन-प्रशासन की यह शिथिलता उनकी कार्यप्रणाली पर एक गहरा दाग है।


प्रमुख सवाल जिनका जवाब जनता चाहती है

क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?

टोल चोरी रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहे?

क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है, इन रसूखदार ट्रक मालिकों के लिए नहीं?

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