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नियमों की धज्जियां: कवर्धा में रद्द RC के बावजूद सड़क पर दौड़ रहा सरकारी वाहन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में कानून की दोहरी कार्यप्रणाली का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ भोरमदेव शक्कर कारखाना के अधीन संचालित एक शासकीय वाहन खुलेआम मोटर वाहन अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस वाहन का पंजीयन प्रमाणपत्र (RC) रद्द हो चुका है, फिर भी यह बेधड़क सड़कों पर दौड़ रहा है।

बिना कागजात और प्लेट के संचालन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सरकारी गाड़ी में न तो HSRP (हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट) लगी है और न ही इसके पास PUC (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) जैसे अनिवार्य दस्तावेज हैं। नियमों के मुताबिक, RC रद्द होने के बाद वाहन का सड़क पर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन सरकारी रसूख के आगे नियम बौने साबित हो रहे हैं।

दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। यदि यह वाहन किसी हादसे का शिकार होता है या किसी को चपेट में लेता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
बीमा क्लेम: बिना वैध RC के वाहन का बीमा स्वतः ही अमान्य हो जाता है। ऐसे में पीड़ित को मुआवजा मिलना नामुमकिन होगा।

कानूनी पेच: क्या विभाग के उच्च अधिकारी इस अवैध संचालन की जिम्मेदारी लेंगे?

आम जनता बनाम सरकारी तंत्र

शहर में इन दिनों यातायात विभाग और RTO द्वारा आम नागरिकों और गरीबों पर HSRP और अन्य दस्तावेजों को लेकर लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सरकारी वाहन को मिल रही यह ‘छूट’ प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि नियम केवल आम आदमी की जेब ढीली करने के लिए हैं, सरकारी विभागों के लिए नहीं।

अधिकारियों की चुप्पी

इस मामले में अब तक RTO या संबंधित कारखाने के प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। निगरानी व्यवस्था की इस विफलता ने यह साबित कर दिया है कि रसूखदार संस्थानों के लिए सड़क सुरक्षा के मायने अलग हैं।

बड़ा सवाल: क्या प्रशासन इस वाहन पर वही सख्त कार्रवाई करेगा जो एक आम नागरिक की गाड़ी पर की जाती है, या शासकीय होने का ठप्पा इसे नियमों से ऊपर रखेगा?

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